चाहत

वेसे तो चाहते नही कुछ खुदा से

लेकिन जब भी उठते है ये हाथ दुआ में

जुबां पर तेरा नाम आता है

जहाँ भी रहे,जैसा भी रहे,जिस हाल में रहे

बस तू मेरा रहे

गर चोट कही लगे तुझे तो दर्द मुझे दे

में मर भी जाऊ तो मेरी रूह

तेरे शामियाने में रहे

और क्या मांगू खुदा से

मेरी जान भी दे दे तुझे।

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