प्रेरणा

ख़ुश रह लिए अगर तब तुम,
जब कुछ नहीं था तुम्हारे पास
तब सोचो कितना मिलेगा सुकून,
जब सब होगा तुम्हारे पास।
भले ही जी रहे हो आज कैसे भी,
एक दिन बन जाओगे तुम भी ख़ास।
मंज़िल चूमेगी क़दम तुम्हारे,
जो हुए ना परेशानियों मे उदास।
छोटी छोटी चीज़ों मे ढूँढो ख़ुशी,
बड़ीं ख़ुशी का भी होगा आभास।
रास्तों पे चलो तो सही एक बार,
छू जाओगे तुम भी आकाश।
रुकावट आए तो ना घबराना,
करते रहना तुम अभ्यास।
चाहत है मंज़िल की अगर,
तो तुम्हारे लिए क्या अवकाश?
सफल तो तुम हो ही किसी ना किसी चीज़ में,
तो हार के ना बनो तुम दास।
तो बस उठो ओर चलो मेहनत की और,
तोड़ दो उलझन का कारावास।
अरे ज़िंदादिली दिखाओ हर रोज़ तुम,
क्यूँ बन बैठे हो जैसे कोई लाश।
दुःख आँख से बह जाने दो,
ओढ़ लो तुम ख़ुशी का लिबास।
चलो मंज़िल ना मिली कुछ तो नया सीखा तुमने,
हर रास्ते पे चलो तो बिंदास।
जीत गये तो सफल हए तुम,
हार भी गये तो क्यू हो उदास?
लोगों क्या कहेंगे ये मत सोचो,
लोग तो करते आए हैं सबका परिहास।
बेपरवाह हो कर सबसे क़दम बढ़ा लो,
देखना रच ही दोगे तुम इतिहास।
एक दिन सब तुमको मिल ही जाएगा,
आते जाते ही रहते हैं सदा विलास।
मुश्किल तो यहाँ कुछ भी नहीं प्यारे,
मन में हो जाए अगर कर्म का निवास।

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