Covid 19

भागदोड़ भरीं ज़िंदगी जहाँ रुकने में थीं मनायी
गाड़ीयो के शोर शराबें को थी हमने अपनी ज़िंदगी बनायी
रोज़ व्यापार पर जाना छुट्टी ना मिलने पर नए बाहने बनाना
गाँवों को छोड़ कर सहरों में अपनी दुनिया बसाना
समुंदर के किनारे रेत के क़िले बनाना
अपने घरों में सिर्फ़ रात को सोने के लिए आना
अपनो के साथ होते हुए उनके लिए वक़्त नहि था
मनुष्य क्यूँकि केवल कमाने में व्यस्त था
पर अब हवाए बदलने लगी है फ़िज़ाये रूथने लगी है
मूह मोड़कर अपना ना जाने कहा जाने लगी है
जीवन नहीं थेरा बस रफ़्तार धीमी हुई है
एक विदेश से आयी महामारी ने दुनिया घेरी हुई है
आज घरों के बाहर वर्दी का पहरा है
पहली बार मनुष्य अपने घरों में थेरा है
जीवन में ऐसा वक़्त आया है
जीने के लिए मानव ने कमाने को ठुकराया है
आज गली , बस्ती , सड़क ,सूना देश का हर एक कोना है
अखबारो में छाया सिर्फ़ ओर सिर्फ़ कोरोना है
अब रोज़ पुरानी तस्वीरों का पिटारा घरों में खुलता है
कोई नए व्रंज़न खाता है तो कोई भूकें पेट ही सोता है
घर में क्यूँ केद है हम रोज़ इसकी पुकार लगाकर सरकार को कोसते है
सालों से पिंजरो में जो जानवर बंद है क्या उसके बारे में कभी हम सोचते है
बंद हुए स्कूल बच्चों के मुख पर छाई ख़ुशियाली है
घंटी की ध्वनि ओर दियों की चमक से लोगों ने रोज़ बनायी दिवाली है
आज भी सफ़ेद वर्दी में रोज़ एक मसीहा घर से निकलता है
पूछो उस माँ से केसे उसका जीं मचलता है
घर के बाहर हमारे आज भी सफ़ाई है
क्यूँकि रोज़ किसी के भहाई ने अपनी ज़िम्मेदारी निभायी है
अब भी किसान खेतों को जोतता है
देश ना सोए भूका बस यही वो सोचता है
अन्न की दुकानो के बाहर लगी लम्बी क़तारें है
बड़े बड़े देश भी आज इस महामारी से हारे है
गले मिलकर जहाँ लोग थे मुश्कुराते
वही आज मरघट तक लेजाने के लिए सामने चार काँधे तक नहीं आते
मंदिर मस्जिद हुए बंद ये सोच रहे थे सब
पर ईश्वर हमारा बेठा अस्पतालों में अब
नमस्कार का प्रचलन पूरे विश्व ने अपनाया है
महाभारत और रामायण से इस पिडी को अवगत कराया है
हवाए अब पहले से जादा साफ़ है
लगता है प्रकृति का ये नया इंसाफ़ है
पेड़ काटकर हमने जानवरो के घर मिटाए है
अपने बिश्तर सजाकर उनके स्वप्न जलाए है
प्रकृति अपना इंसाफ़ खुद लेगी जब जब दोगे उसको पीड़ा
क्यूँ मनुष्य ये नहीं मान लेता वो भी माट्टी का है एक कीड़ा
आज है समय देने को योगदान भारी
कोरोना से लड़ने की केवल डाक्टरों की नहीं है ज़िम्मेदारी
एक दूसरे से सोशल डिस्टन्सिंग का पालन करना है
बस हमें आज घर में ही रहना है
लाखों ज़िंदगिया हो रही इसमें गुम
खुस रहो कुकी अपनो के साथ हो तुम

बस यूँही बीत जाएँगे ये लाक्डाउन के पल
रख विश्वास आज नही तो ज़रूर कल

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