आरक्षण

*आरक्षण*

भभक उठी ज्वाला,

आरक्षण की मांग की

ये कैसी मांग…??

चारों ओर आग ही आग

बसें फूँकी और ट्रेनें रद्द,

देश के दुश्मन हो रहे गद् गद्

वह दिन दूर नहीं जब,

हिंदुस्तानी ही हिंदुस्तानी को काटेगा,

और भारत की सरकार से,

*आरक्षण* मांगेगा

गृह युद्ध चल जाएगा,

दुश्मन देश की सीमा पर नजर जमाएगा

डोल जायेगा पूरा भारत,

हाहाकार मच जाएगा

कश्मीर से कन्याकुमारी तक,

और गुवाहाटी से चौपाटी तक

आरक्षण का ही मुद्दा होगा

ऐसी स्थिति होगी भारत की,

जो कभी नहीं सोचा होगा

भारत पहले ही धर्म, क्षैत्र, भाषा, पहनावा आदि के नाम पर बँटा हुआ है अब *जाति* के नाम पर बँटने मत दो….

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26 Comments

  1. Pankaj/Mahaveer ji Sharma Namukiya …very nice poetry & Jo aapne likha ha wo 100% sahi likha ha …sir ji aap great ho…👌🏻👌🏻👌🏻

  2. आप सभी को दिल की गहराई से धन्यवाद…आपका प्यार और आशीर्वाद सदैव बना रहे….एक बार फिर आपका धन्यवाद….🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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