इंडिया पढ़ेगा तो इंडिया बढ़ेगा

पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया

सभी गांव वाले लाइन में लगे थे चुप-चाप, परन्तु ये हरिया बड़ा उतावला हो रहा था।

तभी ज़मींदार साब का आदमी उधर से गुज़रा और उसने हरिया को पहचानते ही पकड़ कर बोला – क्यों रे हरिया ! तेरे बीवी बच्चा कहाँ है ? उनको क्यों नहीँ लाया साथ में ?
हरिया- मालिक मेरे लरिका का इस्कूल जाये का था ना इहे खातिर ऊ ना आई पावा। और मेहरिया हमाई आ रही हइये।

इतना सुन कर ज़मींदार का आदमी हँसने लगा और बोला तू पागल है क्या ! यहां नेता जी आ रहे हैं गांव वालों को सौगात देने और तू अपने लौंडे को लाया नहीँ। जानता है इससे 500 रुपये का नुकसान होगा तुझे ?
हरिया के आगे-पीछे खड़े सब लोग हँस दिए।

नेता जी के इंतज़ार में गांव वाले सुबह से खड़े थे। अब दोपहर हो चली थी कि तभी फड़फड़ाता हुआ हेलीकाप्टर आसमान में दिखा, और सब गांव वाले उत्सुकता से ऊपर देखने लगे।
मंच से थोड़ी दूर बने मैदान में हेलीकाप्टर उतरा और उसमें से निकले शुद्ध- सफेद, चमकदार, इस्त्री किये हुए कपड़े पहने नेता जी।
आदेश हुआ मंच से और नेता जी की जयकार होने लगी।
जब तक नेता जी मंच पे आके विराज नही गए तब तक गांव वाले गला फाड़ते रहे।

नेता जी ने मंच से अपना अद्वितीय भाषण शुरू किया कि तभी हरिया की नज़र मंच के बगल में खड़े स्कूल ड्रेस में बच्चों पे पड़ी। वो देख के चौंक गया क्योंकि उन बच्चों में उसका लड़का मनोज भी था। वो कुछ समझ नही पाया।
हरिया भीड़ में धीरे-धीरे सरकते हुए ज़मींदार के आदमी के पास पहुंचा और उसके कान के पास जा के बोला-

मालिक ये इस्कूल के बच्चे हियाँ का कर रहे ? इनका तो इस्कूल का टेम है जे !
तो इसपर ज़मींदार के आदमी ने इसको झिड़ककर बोला – पागल है क्या तू पूरा ? इन बच्चों को नेता जी के स्वागत के लिए लाया गया है। आखिर इनके भविष्य के लिए नई योजनाएं लेके आये हैं हमारे नेता जी।

इससे पहले की हरिया कुछ और बोलता नेता जी का भाषण समाप्त होने वाला था और ज़मींदार को इशारा करना था तालियां बजवाने का, तो वो वहां से सरक लिया।

नेता जी ने अपने सपनों के आदर्श गांव का वर्णन किया, और गांव वालों को उनके सपने याद दिलाये।
भाषण खत्म होने के बाद बच्चों ने नेता जी को फूल माला पहनाई और राष्ट्रगान गाया।
हरिया अपने मनोज को उस मंच पे देख के खुश तो बहुत हुआ, पर हरिया मन ही मन जनता था कि क्या होता है इन सब के बाद। “दुनिया जो देखी है उसने।”

नेता जी ने वादा किया कि जल्द ही इस गांव में अत्याधुनिक लाइब्रेरी बनेगी। नए स्कूल खोले जाएंगे, तथा कम्प्यूटर लगवाए जाएंगे।

अगले एक हफ्ते तक नेता जी के पोस्टर के साथ शिक्षा विभाग का विज्ञापन गांव के हर गली में लग चुका था। “हां, उस पोस्टर पे ज़मींदार साहब और सरपंच साहब भी थे।”

दो महीने बाद बरसात बड़ी गजब की पड़ी और खेती खराब हो गयी।
हरिया ज़मींदार साब के घर पहुंचा कर्ज़ के सूद की माफी के लिए, तो उसने देखा कि किसी जश्न की तैयारी चल रही है।
ज़मींदार साब के घर के बाहर एक टेम्पो खड़ा था, जिसमे कम्प्यूटर के डब्बे रखे जा रहे थे। उन डब्बों पे नेता जी की फ़ोटो और उनकी पार्टी का चुनाव चिन्ह भी था।
हरिया ने एक आदमी को रोक कर पूछा कि भइया का हुई रहा है जे ?
तो उत्तर मिला कि ज़मींदार साब का साला शहर में कंप्यूटर कोचिंग खोलने जा रहा है। उसकी तयारी चल रही है।

खैर हरिया वापस आने लगा क्योंकि ज़मींदार साब मिल नही पाये। वापसी में उसने देखा मनोज मिट्टी से सने कपड़े लिए खेल रहा था। हरिया ने उसे झिड़क कर बुलाया और पूछा-

काहे रे ! इस्कूल काहे नही गया तो ?
मनोज बोला- बाबा इस्कूल की छत टूट गयी सब पानी-पानी हुई गवा। बिलैक बोरड भी खराब हुई गवा, तो मास्टरजी भगा दिए सबका।
हरिया भागता हुआ स्कूल की तरफ गया तो उसने देखा कि स्कूल में जो कि दो कमरों का था, और जिसकी कभी रँगाई-पुताई भी नही हुई थी वो जलमग्न था। ब्लैक-बोर्ड भी तैर रहा था, और चाक के डिब्बे की वजह से उसके आस-पास का पानी सफेद रंग का हो गया था।
और कोई सामान तो था ही नही। बस एक ही चीज़ सही सलामत बची थी, वहां।
वो था दो महीने पहले उसकी दीवार पे लटकाया गया नेता जी की फ़ोटो वाला पोस्टर, जिसपे लिखा था-

“पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया”।

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