तुझे पाक सिपारा कहूँ या कहूँ वज़ू का पानी

तुझे पाक सिपारा कहूँ, या कहूँ मैं वज़ू का पानी.
तेरा मकाम सब से आला, है आला तेरी कहानी

कभी माँ बन के तूने,मुझे आँचल मे है छुपाया
कभी रो पड़ी थी तुम भी,किया मैने जब नादानी

मेरे इफलास के दिन मे,तूने मेरा हौसलो को सिंचा
तू बहन बन के देती रही, नई रोशनियो की रवानी

मैं जब भी हुआ तन्हा सा, तूने मुझे गले लगाकर
माशूक बन के मेरी, किया तूने ज़िंदगी को रूमानी

बिखेरी आँगन मे खुशिया और बुजुरगी का सहारा
आई बन के मेरी बेटी, जैसे खुदा की हो मेहरबानी

ये औरत तू मेरे लिए क्या है मैं कैसे बयां करूँ
तू उन आयतो सी हैं,जो खुदा से जोड़े हैं रिश्ता रूहानी

जावेद अहमद

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