पुरुषार्थ

तेरा कर्म है पुरुषार्थ का
तेरा धर्म है पुरुषार्थ का
तू पार्थ है परमार्थ का
तू युगपुरुष है राष्ट्र का
उठ और बड़ा कदम
दे परिचय अपने स्वाभिमान का

है तुझमें वह बल
जो नदी की धारा को मोड़ दे
इस ब्रह्मांड को अपनी मुट्ठी में बंद कर निचोड़ दें
होगी नहीं जीत इतनी आसान
कि कोई तुम्हें तोहफे में परोस दें
मानव सबल है तू
संघर्ष करना जानता
बस फर्क यही है कि
तू खुद अपने को नहीं पहचानता
होगा एक दिन तेरा भी नाम
बस अपना धर्म निभाये जा
अपना कर्म किए जा…..

About The Author(s)

Share Your Voice

46 Comments

  1. पंकज/महावीर शर्मा जी नमुकिया श्रेष्ठ रचना हैआपकी…

  2. आपकी रचना अति सुंदर है एक व्यक्ति का कर्म ही महान बनाता है और आगे बढ़ाता है

  3. बहुत-बहुत धन्यवाद आपका प्यार और स्नेह बना रहे आपका आशीर्वाद बना रहे और आपके मार्गदर्शन में सदा आगे बढ़ता रहुँ…

  4. बहुत ही उम्दा रचना है, कर्म से ही व्यक्ति की पहचान है, कर्म ही पुजा है, जीवन का सार है

  5. जो जागत है वो पावत है|
    जो सोवत है वो खोवत है||
    बहुत ही बेहतरीन तरीके से आपने अपने विचारों को सबके सामने रखा है|और पुरुषार्थ ही मानव को महान बनाता है|
    बहुत बहुत बधाई हो सर जी…

Leave a Reply